Thursday, June 17, 2010

"manzil"


"मंजिल'


चाहती नहीं थी कहना
ख़ामोशी में खो रही थी
अनचाहे, यूँ ही कुछ लफस निकल गए
अनजानी हरकत ख़ामोशी को यूँ मिली
दिल ने भी दी दस्तक और लब हिलने लगे
कहा सब जो, बस अब तक न कहा था
आँखों की जुबान से बस जो ब्यान था
नम आँखों का भी जैसे अब सब्र टूट गया
अन्दर था जो समेटा,अब समुन्दर बन गया
सन्नाटा या तूफान,फिर भी सुकून है मुझे
दूर थी बहुत, फिर भी मंजिल मिल गयी...

Wednesday, May 19, 2010

"udan Khatola"


उड़न खटोला होता दिल तो उड़ जाती
ख्यालों के संग,
छू आती आसमान और रंग बिरंगे रंग,
पंख बिना ही हो आती , जहाँ मन भरता है उड़ान,
जिस मंजिल की तलाश में खोई मैं सुबह शाम ,
न कोई डगर, न कोई मुकाम ,और न ही कोई नाम ,
बस दूर से ही कर आती, उस मंज़र को सलाम.

"journey within"

Thinking, Reflecting, Pondering...going within..
Trying to solve the puzzle as mysteries unfold..
Today, the bygones, the tears,the smiles...
the conflicts,the victories,the memories we hold...What lies yonder, do we ever know...
the trees, the flowers, the blooms, the rivers...
the hills, the mountains bejeweled in snow...
the tangible, untangible, explored, unexplored...
The humble fruit and the proud tree...
the vast ocean and the endless sea...
A flicker of light, and all new hope..
I dare to look, look around, look beyond...
And with great courage, I look within...
slowly...I Move....
A Journey within...

Monday, March 22, 2010

"SAFAR"


"सफ़र"

ज़िन्दगी की डगर पे,दूर बहुत दूर निकल आये हम,
बस चलते रहे हम यूँ ही..जहाँ बड़ते गए कदम,
मंजिल की भी चाह नहीं,बस सफ़र ये चलता रहे,
हमसफ़र हमकदम , बस यूँ ही मिलता रहे.
क्या खोया क्या पाया, अब किसको है गम
ये सफ़र चलता रहे,
कुछ मीठा,कुछ खट्टा कुछ हँसता कुछ नम
कभी मिली ख़ुशी और कभी मिला गम,
कभी धीमी धीमी,मद्धम मद्धम, कभी ज्यादा कभी कम
यूँ चलते उठते सोच रहे थे मेरे ये कदम,
दुनिया बदल गयी और हम रहे न हम.

Monday, February 15, 2010

"Yaad use kiya jaata hai,bhulaya ho jise"


आज फिर ये दिल वही फरियाद करता है
साथ बीते लम्हे फिर याद करता है
क्यों धडकता है दिल
जब देखे बरसों बीत गए
फिर वही बीते वक़्त की दरकार करता है
क्यों यादों के समुन्दर ने घर बना लिया इस दिल में
क्या वो भी वहां मुझे याद करता है
कभी पूछूँ उनसे की याद करते हो किसे
धीमी सी मुस्कान और जवाब मिलता है मुझे
याद उसे किया जाता है ,भुलाया हो जिसे

Thursday, February 4, 2010

"intezar"


" इंतज़ार"

बेकरारी,बेबसी या बस बेखुदी सी है
खुद को खो दिया है या खुद में खो गयी हूँ मैं
धीरे से बहार निकली,फिर सन्नाटा क्यों लगा
या इस बैरागी दिल की धड़कन सुन रही हूँ मैं
ये सहमी सहमी धड़कन भी अब अपनी न लगे
क्यों धड़क रहा है अब भी ये दिल,शायद उम्मीद है उसे
पलों से घंटे,घंटों से दिन,दिनों से महीने ,महीने बने साल
ये करवट बदलते दिन,कभी तो मीलों लम्बे रस्ते,और कभी मात्र क्षण से लगें
कब आएगा आराम इस तड़पते दिल को
जब आएगा विराम इस धडकते दिल को.

Tuesday, February 2, 2010

"soulmate"


The words unsaid,we meet again
Yesterday they were and today they are
For joy and tears,for words incomplete
who cares, as long as it is the meeting of soulmates,once again.
the journey of lives,from today,from the past life,from time immemorial
just a glance, a simple look, the feel of the hand
makes us cross the bridge
once again,towards our solumate...for ever and ever..